सामाजिक सरोकारों को अपनी प्राथमिकताओं में सर्वोपरि स्थान देने वालों के बीच होती रहने वाली शाश्वत् बातचीत का सार यही है कि गिरते सरोकारों और परिणाम में उभरती मूल्य-हीनता के दुःख से सभी ओत-प्रोत तो हैं, सब दूर एक गहरी बेचैनी भी है लेकिन इसे अटल नियति मानकर दर्शक-मात्र बने रहने की मनोदशा ही प्राथमिक हो रही है। दुर्भाग्य से इस प्राथमिकता के विस्तार में रोक लगाने वाले प्रयास जहाँ एक ओर गिने-चुने ही हैं वहीं दूसरी ओर इनमें लोक सरोकारों की सर्व-व्यापकता के प्रति आवश्यक सोच में कोई न कोई कभी भी अपनी तरह से मौजूद है।
विचार करने से एक बात तो यह समझ में आती है कि सक्रियता के औसतन जितने भी प्रयास देखने में मिल रहे हैं उनमें समग्रता की कमी कम से कम इस बिन्दु पर तो है ही कि जिन्होंने भी अपने रुझान का ‘सामाजिक’ होना घोषित किया हुआ है उन्हें अपने उद्देश्य को पाने के लिए न्यायिक औजारों के उपयोग से कमोबेश बड़ा साफ परहेज है; जबकि ‘न्यायिक’ औजारों के उपयोग के महत्व की गहरी समझ रखने वालों में इनसे बाहर जाकर सामाजिक सक्रियता को स्वीकारने में एक तरह से स्पष्ट अरुचि ही दिखायी देती है।
मानसिक धरातल पर अपने बीच समानता देखने वालों को, अपने-अपने अनुभवों के आधार पर, हमेशा से ही लगता रहा है कि सामाजिक रुझानों और न्यायिक औजारों के सन्तुलित सम्मिश्रण की आवश्यकता धीरे-धीरे बढ़ती ही जा रही है।
उपर्युक्त सोच के बारे में मित्रों से लम्बी बातचीत के परिणाम में यह प्रस्ताव सामने आया है कि क्यों न इस सोच से सहमति रखने वाले एकजुट होकर स्वयं ही कोई ऐसा मंच तैयार करें जहाँ इस सोच की परख भी हो जाये। विचार यह बना है कि इस मंच के गठन की सभी आवश्यक औपचारिकताएँ भले ही समय पाकर पूरी की जाएँ, इसका अनौपचारिक गठन यथा-शीघ्र कर लिया जाये।
सभी बातों को ध्यान में रखकर हम इस निर्णय पर पहुँचे हैं कि व्यापक लोक-सरोकारों के प्रति एक समग्र सोच रखने वाले इस मंच को ‘सजग’ नाम दिया जाये जो अपना अर्थ स्पष्ट करने में स्वयं ही सक्षम है। इस नाम का एक दूसरा भी पक्ष है और वह यह कि इसे अंग्रेजी के ‘SAJAG’ से बनाया गया है जो अपने आप में Social And Judicial Action Group के पहले अक्षरों के सम्मिश्रण से उपजा संक्षिप्त नाम है । ‘Social And Judicial Action Group’ प्रस्तावित मंच के ध्येय और उसकी कार्य-प्रणाली दोनों को सरलता से स्पष्ट कर देता है।
क्योंकि जो भी सोचा गया है वह व्यापक भागीदारी के बिना महज दिवा स्वप्न होकर ही रह जायेगा इसलिए किसी प्रकार के संकोच से ऊपर उठकर इस प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया अवश्य भेजें। इस प्रतिक्रिया में यदि सहमति-असहमति के सभी बिन्दुओं के अतिरिक्त आपकी अपनी सक्रिय भागीदारी की सम्भावनाओं का भी उल्लेख हो तो वह हमारे प्रयास की आरम्भिक सफलता का पहला स्तम्भ होगा। इसके आगे यदि आप हमारे इस प्रयास के बारे में अपने व्यक्तिगत् परिचय अथवा अपनी व्यक्तिगत् जानकारी के दायरे में अन्य सुपात्रों को सूचित करते हैं और उन सभी के पत्राचार के पतों से (सम्भव हो तो इसमें उनसे सम्पर्क के दूरभाष/मोबाइल नम्बर और ई-मेल के पते भी शामिल कर लें) हमें अवगत् करायेंगे तो यह उपलब्धि सजग के लिए ‘सोने में सुहागे’ जैसी होगी।





